Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.89.d1: जो दुःख में दुखी नहीं होता, सुख में मदमस्त नहीं होता तथा सबके साथ समान व्यवहार करता है, उसे धैर्यवान कहते हैं। बुद्धिमान व्यक्ति यहाँ किसी विषय में अधिक आसक्त नहीं होता, अपनी बुद्धि से भाग्य को बहुत शक्तिशाली मानता है। | mahabharat अध्याय 1.89: ययाति और अष्टकका संवाद । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(दु:खे न खिद्येन्न सुखेन माद्येत्
समेन वर्तेत स धीरधर्मा।
दिष्टं बलीय: समवेक्ष्य बुद्ध्या
न सज्जते चात्र भृशं मनुष्य:॥ )
अनुवाद
जो दुःख में दुखी नहीं होता, सुख में मदमस्त नहीं होता तथा सबके साथ समान व्यवहार करता है, उसे धैर्यवान कहते हैं। बुद्धिमान व्यक्ति यहाँ किसी विषय में अधिक आसक्त नहीं होता, अपनी बुद्धि से भाग्य को बहुत शक्तिशाली मानता है।
The one who does not get sad in sorrow, does not get intoxicated by happiness and treats everyone with equal respect, is called patient. An intelligent person does not get too attached to any subject here, considering destiny to be very powerful with his intellect.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥