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mahabharat 1.89.2: मैं आपसे बड़ा हूँ, इसलिए आपको प्रणाम नहीं कर रहा हूँ। द्विजों में जो ज्ञान, तप और आयु में बड़ा है, वही पूजनीय माना गया है॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 1.89: ययाति और अष्टकका संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 89: ययाति और अष्टकका संवाद  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.89.2 
अहं हि पूर्वो वयसा भवद्भॺ-
स्तेनाभिवादं भवतां न प्रयुञ्जे।
यो विद्यया तपसा जन्मना वा
वृद्ध: स पूज्यो भवति द्विजानाम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
मैं आपसे बड़ा हूँ, इसलिए आपको प्रणाम नहीं कर रहा हूँ। द्विजों में जो ज्ञान, तप और आयु में बड़ा है, वही पूजनीय माना गया है॥ 2॥
 
I am older than you, so I am not bowing to you. Among the twice-born, the one who is older in knowledge, penance and age is considered worthy of worship.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)