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mahabharat 1.89.18: वह परमपिता ब्रह्मा का निवास था। मैं वहाँ समस्त देवताओं से आदर पाकर अपनी इच्छानुसार भिन्न-भिन्न लोकों में विचरण करता हुआ रहता था। उस समय मेरा प्रभाव और तेज देवताओं के समान था॥ 18॥   |   mahabharat अध्याय 1.89: ययाति और अष्टकका संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 89: ययाति और अष्टकका संवाद  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.89.18 
स देवदेवस्य निवेशने च
विहृत्य लोकानवसं यथेष्टम्।
सम्पूज्यमानस्त्रिदशै: समस्तै-
स्तुल्यप्रभावद्युतिरीश्वराणाम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वह परमपिता ब्रह्मा का निवास था। मैं वहाँ समस्त देवताओं से आदर पाकर अपनी इच्छानुसार भिन्न-भिन्न लोकों में विचरण करता हुआ रहता था। उस समय मेरा प्रभाव और तेज देवताओं के समान था॥ 18॥
 
That was the abode of the supreme God Brahma. I lived there with respect from all the gods, roaming in different worlds according to my wish. At that time my influence and glory were like that of the gods.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)