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mahabharat 1.84.8: हे बुद्धिमान धर्मराज! आपके बहुत से पुत्र हैं जो आपको मुझसे भी अधिक प्रिय हैं; अतः आप अपना बुढ़ापा बिताने के लिए किसी अन्य पुत्र को चुन लीजिए।   |   mahabharat अध्याय 1.84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.84.8 
सन्ति ते बहव: पुत्रा मत्त: प्रियतरा नृप।
जरां ग्रहीतुं धर्मज्ञ तस्मादन्यं वृणीष्व वै॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे बुद्धिमान धर्मराज! आपके बहुत से पुत्र हैं जो आपको मुझसे भी अधिक प्रिय हैं; अतः आप अपना बुढ़ापा बिताने के लिए किसी अन्य पुत्र को चुन लीजिए।
 
O wise king of Dharma! You have many sons who are dearer to you than me; therefore, choose some other son to spend your old age with.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)