ययातिरुवाच
पूरो प्रीतोऽस्मि ते वत्स प्रीतश्चेदं ददामि ते।
सर्वकामसमृद्धा ते प्रजा राज्ये भविष्यति॥ ३३॥
अनुवाद
ययाति बोले - बेटा! पुरो! मैं तुमसे प्रसन्न हूँ और प्रसन्न होकर तुम्हें यह वरदान देता हूँ - 'तुम्हारे राज्य में सभी लोग अपनी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करेंगे।'
Yayati said - Son! Puro! I am pleased with you and being pleased I give you this boon - 'All the people in your kingdom will be blessed with all their desires.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥