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mahabharat 1.84.30: वैशम्पायन कहते हैं - जब ययाति ने ऐसा कहा, तो पुरु ने विनम्रतापूर्वक अपने पिता से कहा - 'महाराज! आप मुझे जो कुछ करने की आज्ञा दे रहे हैं, मैं आपकी उस आज्ञा का पालन करूँगा।'   |   mahabharat अध्याय 1.84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.84.30 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त: प्रत्युवाच पूरु: पितरमञ्जसा।
यथाऽऽत्थ मां महाराज तत् करिष्यामि ते वच:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जब ययाति ने ऐसा कहा, तो पुरु ने विनम्रतापूर्वक अपने पिता से कहा - 'महाराज! आप मुझे जो कुछ करने की आज्ञा दे रहे हैं, मैं आपकी उस आज्ञा का पालन करूँगा।'
 
Vaishmpayana says - When Yayati said this, Puru humbly told his father - 'Maharaj! Whatever you are ordering me to do, I will follow that command of yours.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)