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mahabharat 1.84.23: तब ययाति ने अनुसेई से कहा, 'अनो, तुम मेरे पापों को बुढ़ापे सहित ले लो, और मैं तुम्हारी युवावस्था में एक हजार वर्ष तक सुख भोगूंगा।   |   mahabharat अध्याय 1.84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.84.23 
ययातिरुवाच
अनो त्वं प्रतिपद्यस्व पाप्मानं जरया सह।
एकं वर्षसहस्रं तु चरेयं यौवनेन ते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तब ययाति ने अनुसेई से कहा, 'अनो, तुम मेरे पापों को बुढ़ापे सहित ले लो, और मैं तुम्हारी युवावस्था में एक हजार वर्ष तक सुख भोगूंगा।
 
Thereupon Yayati said to Anusei, 'Ano, take my sins along with old age, and I shall enjoy happiness through your youth for a thousand years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)