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mahabharat 1.84.11: एक हजार वर्ष पूरे होने पर मैं तुम्हारी जवानी लौटा दूँगा और बुढ़ापे सहित अपने दोष भी ले लूँगा ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.84.11 
पूर्णे वर्षसहस्रे तु पुनर्दास्यामि यौवनम्।
स्वं चैव प्रतिपत्स्यामि पाप्मानं जरया सह॥ ११॥
 
 
अनुवाद
एक हजार वर्ष पूरे होने पर मैं तुम्हारी जवानी लौटा दूँगा और बुढ़ापे सहित अपने दोष भी ले लूँगा ॥11॥
 
After the completion of one thousand years, I will return your youth and take back my faults along with old age. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)