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mahabharat 1.84.10: (अब उन्होंने तुर्वसु को बुलाकर कहा-) तुर्वसु! बुढ़ापे के साथ मेरा दोष भी ले लो। बेटा! मैं तुम्हारी जवानी से विषय-सुख भोगूँगा।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.84.10 
तुर्वसो प्रतिपद्यस्व पाप्मानं जरया सह।
यौवनेन चरेयं वै विषयांस्तव पुत्रक॥ १०॥
 
 
अनुवाद
(अब उन्होंने तुर्वसु को बुलाकर कहा-) तुर्वसु! बुढ़ापे के साथ मेरा दोष भी ले लो। बेटा! मैं तुम्हारी जवानी से विषय-सुख भोगूँगा।॥10॥
 
(Now he called Turvasu and said-) Turvasu! Take my fault along with old age. Son! I will enjoy the sensual pleasures from your youth.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)