Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.83.31: शुक्राचार्य बोले, "महाराज! धर्म के ज्ञाता होने पर भी आपने अधर्म को प्रिय माना है और उसका आचरण किया है। अतः दुर्जय बुढ़ापा शीघ्र ही आप पर हावी हो जाएगा।" | mahabharat अध्याय 1.83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शुक्र उवाच
धर्मज्ञ: सन् महाराज योऽधर्ममकृथा: प्रियम्।
तस्माज्जरा त्वामचिराद् धर्षयिष्यति दुर्जया॥ ३१॥
अनुवाद
शुक्राचार्य बोले, "महाराज! धर्म के ज्ञाता होने पर भी आपने अधर्म को प्रिय माना है और उसका आचरण किया है। अतः दुर्जय बुढ़ापा शीघ्र ही आप पर हावी हो जाएगा।"
Shukracharya said, "Maharaj! Even though you are a knower of Dharma, you have loved Adharma and have practiced it. Therefore, old age, which is difficult to conquer, will soon overpower you." 31.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥