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mahabharat 1.83.3: शर्मिष्ठा बोली, "मित्र! एक पुण्यात्मा ऋषि आये थे, जो वेदों के अच्छे ज्ञाता थे। मैंने उन वरदाता ऋषि से धर्मानुसार मैथुन की प्रार्थना की।"   |   mahabharat अध्याय 1.83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.83.3 
शर्मिष्ठोवाच
ऋषिरभ्यागत: कश्चिद् धर्मात्मा वेदपारग:।
स मया वरद: कामं याचितो धर्मसंहितम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
शर्मिष्ठा बोली, "मित्र! एक पुण्यात्मा ऋषि आये थे, जो वेदों के अच्छे ज्ञाता थे। मैंने उन वरदाता ऋषि से धर्मानुसार मैथुन की प्रार्थना की।"
 
Sharmishtha said, "Friend! A virtuous sage had come, who was well versed in the Vedas. I requested that boon-giving sage for sex according to the dharma."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)