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mahabharat 1.83.2: देवयानी बोली, "हे सुन्दर भौंहों वाली शर्मिष्ठा! तुमने काम-वासना में कौन-सा पाप किया है?"   |   mahabharat अध्याय 1.83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.83.2 
देवयान्युवाच
किमिदं वृजिनं सुभ्रु कृतं वै कामलुब्धया॥ २॥
 
 
अनुवाद
देवयानी बोली, "हे सुन्दर भौंहों वाली शर्मिष्ठा! तुमने काम-वासना में कौन-सा पाप किया है?"
 
Devayani said, "O Sharmishtha with beautiful eyebrows! What sin have you committed in your lust?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)