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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना  »  श्लोक 14h
 
 
श्लोक  1.83.14h 
वैशम्पायन उवाच
एवं पृष्ट्वा तु राजानं कुमारान् पर्यपृच्छत।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! इस प्रकार राजा से पूछकर उसने उन राजकुमारों से प्रश्न किया।
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! After asking the king in this manner he questioned those princes. 13 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)