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श्लोक 1.82.27  |
प्रजज्ञे च तत: काले राजन् राजीवलोचना।
कुमारं देवगर्भाभं राजीवनिभलोचनम्॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| जनमेजय! तत्पश्चात समय आने पर कमल के समान नेत्रों वाली शर्मिष्ठा ने दिव्य बालक के समान सुन्दर कमल नेत्रों वाले एक बालक को जन्म दिया॥ 27॥ |
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| Janamejaya! Thereafter, when the time came, Sharmishtha, having eyes like lotus flowers, gave birth to a child with lotus eyes, as beautiful as a divine child.॥ 27॥ |
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इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि ययात्युपाख्याने द्वॺशीतितमोऽध्याय:॥ ८२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें ययात्युपाख्यानविषयक बयासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८२॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ११ श्लोक मिलाकर कुल ३८ श्लोक हैं) |
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