| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 82: ययातिसे देवयानीको पुत्र-प्राप्ति; ययाति और शर्मिष्ठाका एकान्त मिलन और उनसे एक पुत्रका जन्म » श्लोक 22 |
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| | | | श्लोक 1.82.22  | त्रय एवाधना राजन् भार्या दासस्तथा सुत:।
यत् ते समधिगच्छन्ति यस्यैते तस्य तद् धनम्॥ २२॥ | | | | | | अनुवाद | | महाराज! तीन व्यक्ति धन के अधिकारी नहीं हैं - पत्नी, दास और पुत्र। वे जो धन अर्जित करते हैं, वह उसी का होता है जिसके वे स्वामी होते हैं। अर्थात् पत्नी के धन पर पति का, दास के धन पर स्वामी का और पुत्र के धन पर पिता का अधिकार होता है॥ 22॥ | | | | Maharaj! Three persons are not entitled to wealth- wife, servant and son. The wealth that they acquire belongs to the one in whose possession they are. That is, the husband has a right over the wife's wealth, the master has a right over the servant's wealth and the father has a right over the son's wealth.॥ 22॥ | | ✨ ai-generated | | |
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