| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 82: ययातिसे देवयानीको पुत्र-प्राप्ति; ययाति और शर्मिष्ठाका एकान्त मिलन और उनसे एक पुत्रका जन्म » श्लोक 16 |
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| | | | श्लोक 1.82.16  | शर्मिष्ठोवाच
न नर्मयुक्तं वचनं हिनस्ति
न स्त्रीषु राजन् न विवाहकाले।
प्राणात्यये सर्वधनापहारे
पञ्चानृतान्याहुरपातकानि॥ १६॥ | | | | | | अनुवाद | | शर्मिष्ठा बोली- राजन! हास्य-विनोदपूर्ण कथन भी यदि असत्य हो, तो भी वह अहितकर नहीं होता। यदि किसी को अपनी पत्नी के प्रति, विवाह के समय, प्राण-संकट के समय अथवा किसी का अपहरण होते समय विवश होकर असत्य बोलने को कहा जाए, तो वह निंद्य नहीं होता। ये पाँच प्रकार के झूठ पापरहित कहे गए हैं। 16॥ | | | | Sharmistha said- Rajan! Even if a humorous statement is untrue, it is not harmful. If one is forced to speak untruth towards one's wife, at the time of marriage, at the time of life-threatening situation or when someone is being kidnapped, then it is not blameworthy. These five types of lies are said to be sinless. 16॥ | | ✨ ai-generated | | |
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