श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.81.35 
इयं चापि कुमारी ते शर्मिष्ठा वार्षपर्वणी।
सम्पूज्या सततं राजन् मा चैनां शयने ह्वये:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वृषपर्वा की पुत्री यह कुमारी शर्मिष्ठा भी आपको समर्पित है। इसका सदैव आदर करना, किन्तु इसे कभी अपने शयन-शयन पर न बुलाना।
 
Maharaj! This Kumari Sharmishtha, daughter of Vrishparva, is also dedicated to you. Always respect her, but never call her to your bed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)