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mahabharat 1.81.34: तुम सुन्दरी देवयानी को धर्मपूर्वक अपनी पत्नी बनाओ और उसके साथ रहकर अपार सुख और आनन्द प्राप्त करो॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 1.81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.81.34 
वहस्व भार्यां धर्मेण देवयानीं सुमध्यमाम्।
अनया सह सम्प्रीतिमतुलां समवाप्नुहि॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
तुम सुन्दरी देवयानी को धर्मपूर्वक अपनी पत्नी बनाओ और उसके साथ रहकर अपार सुख और आनन्द प्राप्त करो॥ 34॥
 
You should make the beautiful Devayani your wife in a righteous manner and live with her to derive immense joy and happiness.॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)