vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह
»
श्लोक 22
श्लोक
1.81.22
कथं नु मे मनस्विन्या: पाणिमन्य: पुमान् स्पृशेत्।
गृहीतमृषिपुत्रेण स्वयं वाप्यृषिणा त्वया॥ २२॥
अनुवाद
मैं मन को वश में रखने वाली स्त्री हूँ। कोई दूसरा पुरुष राजकुमार या आप जैसे राजकुमार द्वारा पकड़े हुए मेरे हाथ को कैसे छू सकता है? ॥22॥
I am a woman who controls her mind. How can any other man touch my hand held by a prince or a prince like you? ॥22॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd