Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.81.21: देवयानी बोली, "नहुषकुमार! स्त्री के लिए विवाह में हाथ मिलाना एक कर्तव्य है। इससे पहले किसी पुरुष ने मेरा हाथ नहीं पकड़ा था। आपने ही सबसे पहले मेरा हाथ पकड़ा है। इसलिए मैं आपको अपना पति स्वीकार करती हूँ।" | mahabharat अध्याय 1.81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवयान्युवाच
पाणिधर्मो नाहुषायं न पुम्भि: सेवित: पुरा।
तं मे त्वमग्रहीरग्रे वृणोमि त्वामहं तत:॥ २१॥
अनुवाद
देवयानी बोली, "नहुषकुमार! स्त्री के लिए विवाह में हाथ मिलाना एक कर्तव्य है। इससे पहले किसी पुरुष ने मेरा हाथ नहीं पकड़ा था। आपने ही सबसे पहले मेरा हाथ पकड़ा है। इसलिए मैं आपको अपना पति स्वीकार करती हूँ।"
Devayani said— Nahushkumar! For a woman, taking a hand in marriage is a duty. No man had held my hand before. You were the first one to hold my hand. That is why I accept you as my husband.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥