Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.81.20: ययाति बोले - हे वरंगियन! चारों वर्ण एक ही परमेश्वर के शरीर से उत्पन्न हुए हैं; किन्तु उनके धर्म और शुचिता भिन्न-भिन्न हैं। ब्राह्मण सभी वर्णों में श्रेष्ठ है।   |   mahabharat अध्याय 1.81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.81.20 
ययातिरुवाच
एकदेहोद्भवा वर्णाश्चत्वारोऽपि वराङ्गने।
पृथग्धर्मा: पृथक्छौचास्तेषां तु ब्राह्मणो वर:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
ययाति बोले - हे वरंगियन! चारों वर्ण एक ही परमेश्वर के शरीर से उत्पन्न हुए हैं; किन्तु उनके धर्म और शुचिता भिन्न-भिन्न हैं। ब्राह्मण सभी वर्णों में श्रेष्ठ है।
 
Yayati said - O Varangian! All the four castes have originated from the body of the same Supreme Lord; but their religion and cleanliness are different. Brahmins are the best among all the castes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)