Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.81.18: ययाति बोले—शुक्रनन्दिनी देवयानी! तुम्हारा कल्याण हो। भाविनी! मैं तुम्हारे योग्य नहीं हूँ। क्षत्रिय तुम्हारे पिता का हाथ विवाह में स्वीकार करने के अधिकारी नहीं हैं।॥18॥ | mahabharat अध्याय 1.81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ययातिरुवाच
विद्धॺौशनसि भद्रं ते न त्वामर्होऽस्मि भाविनि।
अविवाह्या हि राजानो देवयानि पितुस्तव॥ १८॥
अनुवाद
ययाति बोले—शुक्रनन्दिनी देवयानी! तुम्हारा कल्याण हो। भाविनी! मैं तुम्हारे योग्य नहीं हूँ। क्षत्रिय तुम्हारे पिता का हाथ विवाह में स्वीकार करने के अधिकारी नहीं हैं।॥18॥
Yayati said—Shukranandini Devayani! May you be blessed. Bhavini! I am not worthy of you. Kshatriyas are not entitled to accept your father's hand in marriage.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥