Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.81.12: देवयानी बोली - हे पुरुषश्रेष्ठ! सभी लोग भगवान के नियमों का पालन करते हैं। इसे भाग्य का नियम मानकर संतुष्ट हो जाओ। इस विषय से संबंधित विचित्र घटनाओं के विषय में मत पूछो। ॥12॥ | mahabharat अध्याय 1.81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवयान्युवाच
सर्व एव नरश्रेष्ठ विधानमनुवर्तते।
विधानविहितं मत्वा मा विचित्रा: कथा: कृथा:॥ १२॥
अनुवाद
देवयानी बोली - हे पुरुषश्रेष्ठ! सभी लोग भगवान के नियमों का पालन करते हैं। इसे भाग्य का नियम मानकर संतुष्ट हो जाओ। इस विषय से संबंधित विचित्र घटनाओं के विषय में मत पूछो। ॥12॥
Devayani said - O best of men! Everyone follows the laws of God. Accept this as the law of fate and be satisfied. Do not ask about the strange events related to this matter. ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥