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mahabharat 1.8.24-26h: तदनन्तर स्वस्तत्रेय, महाजनु, कुशिक, शंखमेखल, उद्दालक, कठ, महातेजस्वी श्वेत, भरद्वाज, कौन्कुत्स्य, अर्ष्टिषेण, गौतम, प्रमति अपने पुत्र रुरु सहित तथा अन्य सभी वनवासी, श्रेष्ठ द्विज, दया से द्रवित होकर वहाँ आये। 24-25 1/2   |   mahabharat अध्याय 1.8: प्रमद्वराका जन्म, रुरुके साथ उसका वाग्दान तथा विवाहके पहले ही साँपके काटनेसे प्रमद्वराकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 8: प्रमद्वराका जन्म, रुरुके साथ उसका वाग्दान तथा विवाहके पहले ही साँपके काटनेसे प्रमद्वराकी मृत्यु  »  श्लोक 24-26h
 
 
श्लोक  1.8.24-26h 
तत: सर्वे द्विजवरा: समाजग्मु: कृपान्विता:।
स्वस्त्यात्रेयो महाजानु: कुशिक: शङ्खमेखल:॥ २४॥
उद्दालक: कठश्चैव श्वेतश्चैव महायशा:।
भरद्वाज: कौणकुत्स्य आर्ष्टिषेणोऽथ गौतम:॥ २५॥
प्रमति: सह पुत्रेण तथान्ये वनवासिन:।
 
 
अनुवाद
तदनन्तर स्वस्तत्रेय, महाजनु, कुशिक, शंखमेखल, उद्दालक, कठ, महातेजस्वी श्वेत, भरद्वाज, कौन्कुत्स्य, अर्ष्टिषेण, गौतम, प्रमति अपने पुत्र रुरु सहित तथा अन्य सभी वनवासी, श्रेष्ठ द्विज, दया से द्रवित होकर वहाँ आये। 24-25 1/2
 
Thereafter, Swastyatreya, Mahajanu, Kushik, Shankhamekhal, Uddalak, Kath, the great-illustrious Shvet, Bharadwaj, Kaunkutsya, Arshtishen, Gautam, Pramati along with his son Ruru and all the other forest dwellers, the best Dwijas, came there, moved by mercy. 24-25 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)