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mahabharat 1.8.19: उस समय काल के नियम से प्रेरित होकर सर्प ने उस असावधान कन्या के शरीर में अपने विषैले दांत गड़ा दिये।   |   mahabharat अध्याय 1.8: प्रमद्वराका जन्म, रुरुके साथ उसका वाग्दान तथा विवाहके पहले ही साँपके काटनेसे प्रमद्वराकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 8: प्रमद्वराका जन्म, रुरुके साथ उसका वाग्दान तथा विवाहके पहले ही साँपके काटनेसे प्रमद्वराकी मृत्यु  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.8.19 
स तस्या: सम्प्रमत्तायाश्चोदित: कालधर्मणा।
विषोपलिप्तान् दशनान् भृशमङ्गे न्यपातयत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उस समय काल के नियम से प्रेरित होकर सर्प ने उस असावधान कन्या के शरीर में अपने विषैले दांत गड़ा दिये।
 
At that time, inspired by the law of time, the serpent dug its venomous teeth hard into the body of the unwary girl.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)