श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 8: प्रमद्वराका जन्म, रुरुके साथ उसका वाग्दान तथा विवाहके पहले ही साँपके काटनेसे प्रमद्वराकी मृत्यु  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  1.8.1-2 
सौतिरुवाच
स चापि च्यवनो ब्रह्मन् भार्गवोऽजनयत् सुतम्।
सुकन्यायां महात्मानं प्रमतिं दीप्ततेजसम्॥ १॥
प्रमतिस्तु रुरुं नाम घृताच्यां समजीजनत् ।
रुरु: प्रमद्वरायां तु शुनकं समजीजनत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी कहते हैं- ब्रह्मन्! भृगुपुत्र च्यवन ने अपनी पत्नी सुकन्या के गर्भ से एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम प्रमति रखा गया। महात्मा प्रमति बड़े तेजस्वी थे। फिर प्रमत्य ने घृताची अप्सरा से रुरु नामक पुत्र को जन्म दिया और रुरु से प्रमद्वरा के गर्भ से शुनक का जन्म हुआ। 1-2॥
 
Ugrashravaji says- Brahmin! Bhrigu's son Chyavan gave birth to a son from the womb of his wife Sukanya, whose name was Pramati. Mahatma Pramati was very brilliant. Then Pramatya gave birth to a son named Ruru from Ghritachi Apsara and through Ruru, Shunak was born from the womb of Pramadvara. 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)