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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप
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श्लोक 31
श्लोक
1.78.31
देवयान्युवाच
निष्कृतिर्मेऽस्तु वा मास्तु शृणुष्वावहितो मम॥ ३१॥
अनुवाद
देवयानी बोली—पिताजी! मुझे अपने कर्मों का फल मिले या न मिले, कृपया मेरी बात ध्यानपूर्वक सुनें॥31॥
Devayani said—Father! Whether I get the fruits of my deeds or not, please listen to me carefully.॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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