Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.76.d2: कच्छ बोला, "हे प्रभु! मुझ पर प्रसन्न होइए। मैं कच्छ हूँ और आपके चरणों में प्रणाम करता हूँ। जैसे एक पिता अपने पुत्र से बहुत प्रेम करता है, वैसे ही मुझे भी अपना स्नेहपात्र मानिए।" | mahabharat अध्याय 1.76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कच्छ बोला, "हे प्रभु! मुझ पर प्रसन्न होइए। मैं कच्छ हूँ और आपके चरणों में प्रणाम करता हूँ। जैसे एक पिता अपने पुत्र से बहुत प्रेम करता है, वैसे ही मुझे भी अपना स्नेहपात्र मानिए।"
Kachha said— O Lord! Please be pleased with me. I am Kachha and I bow down to your feet. Just like a father loves his son a lot, please consider me as your object of affection.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥