Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.76.51: वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! देवयानी के वचनों से दुःखी महर्षि शुक्राचार्य ने कच को बुलाया और दैत्यों के प्रति क्रोधपूर्वक बोले - 'इसमें कोई संदेह नहीं कि दैत्य मुझसे द्वेष करते हैं। इसीलिए ये लोग यहाँ आने वाले मेरे शिष्यों को मार डालते हैं॥ 51॥ | mahabharat अध्याय 1.76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
स पीडितो देवयान्या महर्षि:
समाह्वयत् संरम्भाच्चैव काव्य:।
असंशयं मामसुरा द्विषन्ति
ये मे शिष्यानागतान् सूदयन्ति॥ ५१॥
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! देवयानी के वचनों से दुःखी महर्षि शुक्राचार्य ने कच को बुलाया और दैत्यों के प्रति क्रोधपूर्वक बोले - 'इसमें कोई संदेह नहीं कि दैत्य मुझसे द्वेष करते हैं। इसीलिए ये लोग यहाँ आने वाले मेरे शिष्यों को मार डालते हैं॥ 51॥
Vaishampayana says - Janamejaya! Maharishi Shukracharya, saddened by Devayani's words, called Kacha and said in anger towards the demons - 'There is no doubt that the demons hate me. That is why these people kill my disciples who come here.॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥