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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.76.41 
वनं ययौ कचो विप्रो ददृशुर्दानवाश्च तम्।
पुनस्तं पेषयित्वा तु समुद्राम्भस्यमिश्रयन्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
इसी उद्देश्य से महाबली ब्राह्मण कच वन में गया। वहाँ राक्षसों ने उसे देखा और कुचलकर समुद्र के जल में घोल दिया। 41।
 
For this purpose the great Brahmin Kach went to the forest. There the demons saw him and then crushed him and dissolved him in the water of the sea. 41.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)