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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.76.30 
सा दृष्ट्वा रहिता गाश्च कचेनाभ्यागता वनात्।
उवाच वचनं काले देवयान्यथ भारत॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! जब देवयानी ने देखा कि गौएँ वन से लौट आई हैं, परन्तु कच उनके साथ नहीं है, तब वह अपने पिता से इस प्रकार बोली।
 
Janamejaya! When Devayani saw that the cows had returned from the forest but Kacha was not with them, she spoke to her father as follows. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)