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mahabharat 1.76.17: फिर 'बहुत अच्छा' कहकर बृहस्पतिपुत्र कच देवताओं से सम्मानित होकर वहाँ से वृषपर्वा के पास चला गया ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.76.17 
तथेत्युक्त्वा तत: प्रायाद् बृहस्पतिसुत: कच:।
तदाभिपूजितो देवै: समीपे वृषपर्वण:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
फिर 'बहुत अच्छा' कहकर बृहस्पतिपुत्र कच देवताओं से सम्मानित होकर वहाँ से वृषपर्वा के पास चला गया ॥17॥
 
Then saying 'very good', Brihaspati's son got honored by the Kacha gods and from there he went near Vrishparva. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)