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mahabharat 1.76.15: उस महात्मा की प्रिय पुत्री का नाम देवयानी है। केवल आप ही अपनी सेवा से उसे प्रसन्न कर सकते हैं। अन्य कोई ऐसा करने में समर्थ नहीं है।॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.76.15 
देवयानीं च दयितां सुतां तस्य महात्मन:।
त्वमाराधयितुं शक्तो नान्य: कश्चन विद्यते॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उस महात्मा की प्रिय पुत्री का नाम देवयानी है। केवल आप ही अपनी सेवा से उसे प्रसन्न कर सकते हैं। अन्य कोई ऐसा करने में समर्थ नहीं है।॥15॥
 
‘The name of that great soul's beloved daughter is Devayani. Only you can please her by your services. No one else is capable of doing this.'॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)