श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक d56-d57
 
 
श्लोक  1.74.d56-d57 
(ममाण्डानीति वर्धन्ते कोकिलानपि वायसा:।
किं पुनस्त्वं न मन्येथा: सर्वज्ञ: पुत्रमीदृशम्॥
मलयाच्चन्दनं जातमतिशीतं वदन्ति वै।
शिशोरालिङ्गॺमानस्य चन्दनादधिकं भवेत्॥ )
 
 
अनुवाद
कौए तो कोयल के अंडों को भी अपने ही अंडे समझकर पालते हैं। फिर सर्वज्ञ होकर आप अपने से उत्पन्न ऐसे सुयोग्य पुत्र का आदर क्यों नहीं करते? लोग कहते हैं कि मलयगिरि का चंदन अत्यंत शीतल होता है, परंतु गोद में लिए हुए बच्चे का स्पर्श चंदन से भी अधिक शीतल और सुखद होता है।
 
Crows nurture even the eggs of cuckoos thinking that these are their own eggs. Then being omniscient why don't you respect such a worthy son born from you? People say that sandalwood from Malayagiri is extremely cool, but the touch of a child held in the lap is even cooler and more pleasant than sandalwood.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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