श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  1.74.72 
कामं त्वया परित्यक्ता गमिष्यामि स्वमाश्रमम्।
इमं तु बालं संत्यक्तुं नार्हस्यात्मजमात्मन:॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
'महाराज! यदि आप स्वेच्छा से मुझे त्याग दें, तो मैं अपने आश्रम लौट जाऊँगी, किन्तु आप अपने इस छोटे पुत्र को न त्यागें।'
 
'Maharaj! If you abandon me willingly, I will return to my hermitage, but you must not abandon this little son of yours.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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