श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  1.74.70 
सा मां हिमवत: प्रस्थे सुषुवे मेनकाप्सरा:।
अवकीर्य च मां याता परात्मजमिवासती॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
उस अप्सरा मेनका ने मुझे हिमालय के शिखर पर जन्म दिया था; परंतु उस दुष्टाचारिणी अप्सरा ने मुझे पराये बालक के समान वहीं छोड़ दिया॥ 70॥
 
‘That Apsara Menaka gave birth to me on the peak of the Himalayas; but that ill-behaved Apsara left me there like a stranger's child.॥ 70॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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