श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  1.74.68 
उर्वशी पूर्वचित्तिश्च सहजन्या च मेनका।
विश्वाची च घृताची च षडेवाप्सरसां वरा:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
'उर्वशी, पूर्वचित्ति, सहजन्या, मेनका, विश्वाची और घृताची - ये छह अप्सराएँ अन्य सभी अप्सराओं से श्रेष्ठ हैं। 68॥
 
‘Urvashi, Purvachitti, Sahajanya, Menaka, Vishwachi and Ghritachi – these six Apsaras are superior to all other Apsaras. 68॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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