श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 114-115h
 
 
श्लोक  1.74.114-115h 
शाकुन्तलं महात्मानं दौष्यन्तिं भर पौरव।
भर्तव्योऽयं त्वया यस्मादस्माकं वचनादपि॥ ११४॥
तस्माद् भवत्वयं नाम्ना भरतो नाम ते सुत:।
 
 
अनुवाद
'पौरव! यह महान बालक शकुन्तला और दुष्यंत दोनों का पुत्र है। हम देवताओं की सलाह के अनुसार तुम इसका पालन करोगे, अतः तुम्हारा यह पुत्र भरत नाम से विख्यात होगा। 114 1/2॥
 
'Paurav! This great child is the son of both Shakuntala and Dushyant. You will support him as per the advice of us gods, hence this son of yours will be famous by the name of Bharat. 114 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas