शाकुन्तलं महात्मानं दौष्यन्तिं भर पौरव।
भर्तव्योऽयं त्वया यस्मादस्माकं वचनादपि॥ ११४॥
तस्माद् भवत्वयं नाम्ना भरतो नाम ते सुत:।
अनुवाद
'पौरव! यह महान बालक शकुन्तला और दुष्यंत दोनों का पुत्र है। हम देवताओं की सलाह के अनुसार तुम इसका पालन करोगे, अतः तुम्हारा यह पुत्र भरत नाम से विख्यात होगा। 114 1/2॥
'Paurav! This great child is the son of both Shakuntala and Dushyant. You will support him as per the advice of us gods, hence this son of yours will be famous by the name of Bharat. 114 1/2॥