श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  1.74.105 
नास्ति सत्यसमो धर्मो न सत्याद् विद्यते परम्।
न हि तीव्रतरं किंचिदनृतादिह विद्यते॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
सत्य के समान कोई धर्म नहीं है। सत्य से श्रेष्ठ कोई वस्तु नहीं है और झूठ से बढ़कर इस संसार में कोई पाप नहीं है। ॥105॥
 
There is no religion like truth. There is nothing better than truth and there is no sin worse than lying in this world. ॥105॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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