श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 73: शकुन्तला और दुष्यन्तका गान्धर्व विवाह और महर्षि कण्वके द्वारा उसका अनुमोदन  »  श्लोक d20
 
 
श्लोक  1.73.d20 
कण्व उवाच
अद्यप्रभृति देवी त्वं दुष्यन्तस्य महात्मन:।
पतिव्रतानां या वृत्तिस्तां वृत्तिमनुपालय॥ )
 
 
अनुवाद
कण्व बोले- पुत्री! आज से तुम महाबली राजा दुष्यंत की रानी हो। अतः पतिव्रता स्त्री का आचरण और आचार-विचार अपनाओ।
 
Kanva said- Daughter! From today you are the queen of the great king Dushyant. Therefore, follow the behavior and moral conduct of a faithful woman.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि शकुन्तलोपाख्याने त्रिसप्ततितमोध्याय:॥ ७३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें शकुन्तलोपाख्यानविषयक तिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७३॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १९ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ५३ १/२ श्लोक हैं)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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