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श्लोक 1.73.d14  |
कण्व उवाच
सव्रीडैव च दीर्घायु: पुरेव भविता न च।
वृत्तं कथय रम्भोरु मा त्रासं च प्रकल्पय॥ |
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| अनुवाद |
| कण्व बोले- पुत्री! तुम दीर्घायु होकर ही मर्यादा में रहोगी। अब तुम पहले जैसी फुर्तीली नहीं रहोगी। शुभ! मुझे सब कुछ स्पष्ट बताओ; डरो मत। |
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| Kanva said— Daughter! You will live long only by remaining modest. Now you will not be as agile as before. Shubh! Tell me everything clearly; do not be afraid. |
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