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mahabharat 1.72.3: उस समय अप्सरा ऋषि को प्रणाम करके उनके समीप आकर नाना प्रकार के खेल खेलने लगी। इसी बीच वायु ने मेनका के चन्द्रमा के समान उज्ज्वल वस्त्र उसके शरीर से उतार दिए।   |   mahabharat अध्याय 1.72: मेनका-विश्वामित्र-मिलन, कन्याकी उत्पत्ति, शकुन्त पक्षियोंके द्वारा उसकी रक्षा और कण्वका उसे अपने आश्रमपर लाकर शकुन्तला नाम रखकर पालन करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 72: मेनका-विश्वामित्र-मिलन, कन्याकी उत्पत्ति, शकुन्त पक्षियोंके द्वारा उसकी रक्षा और कण्वका उसे अपने आश्रमपर लाकर शकुन्तला नाम रखकर पालन करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.72.3 
अभिवाद्य तत: सा तं प्राक्रीडदृषिसंनिधौ।
अपोवाह च वासोऽस्या मारुत: शशिसंनिभम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उस समय अप्सरा ऋषि को प्रणाम करके उनके समीप आकर नाना प्रकार के खेल खेलने लगी। इसी बीच वायु ने मेनका के चन्द्रमा के समान उज्ज्वल वस्त्र उसके शरीर से उतार दिए।
 
At that time, after paying her respects to the sage, the Apsara started playing various games in the vicinity of him. Meanwhile, the wind removed Menaka's moon-like bright clothes from her body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)