Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.72.2: वन में पहुँचकर, डरपोक और सुन्दरी मेनका ने एक आश्रम में ध्यानमग्न ऋषि विश्वामित्र को देखा, जिन्होंने तपस्या द्वारा अपने समस्त पापों को भस्म कर दिया था॥2॥   |   mahabharat अध्याय 1.72: मेनका-विश्वामित्र-मिलन, कन्याकी उत्पत्ति, शकुन्त पक्षियोंके द्वारा उसकी रक्षा और कण्वका उसे अपने आश्रमपर लाकर शकुन्तला नाम रखकर पालन करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 72: मेनका-विश्वामित्र-मिलन, कन्याकी उत्पत्ति, शकुन्त पक्षियोंके द्वारा उसकी रक्षा और कण्वका उसे अपने आश्रमपर लाकर शकुन्तला नाम रखकर पालन करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.72.2 
अथापश्यद् वरारोहा तपसा दग्धकिल्बिषम्।
विश्वामित्रं तप्यमानं मेनका भीरुराश्रमे॥ २॥
 
 
अनुवाद
वन में पहुँचकर, डरपोक और सुन्दरी मेनका ने एक आश्रम में ध्यानमग्न ऋषि विश्वामित्र को देखा, जिन्होंने तपस्या द्वारा अपने समस्त पापों को भस्म कर दिया था॥2॥
 
On reaching the forest, the timid and beautiful Menaka saw the sage Vishwamitra meditating in an ashram. He had burnt all his sins through penance.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)