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mahabharat 1.72.16: वह निर्जन वन में शकुन्तों से घिरी हुई थी, इसलिए ‘शकुन्तं लती रक्षत्वेन गृह्णाति’ इस व्युत्पत्ति के अनुसार मैंने इस कन्या का नाम ‘शकुन्तला’ रखा ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 1.72: मेनका-विश्वामित्र-मिलन, कन्याकी उत्पत्ति, शकुन्त पक्षियोंके द्वारा उसकी रक्षा और कण्वका उसे अपने आश्रमपर लाकर शकुन्तला नाम रखकर पालन करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 72: मेनका-विश्वामित्र-मिलन, कन्याकी उत्पत्ति, शकुन्त पक्षियोंके द्वारा उसकी रक्षा और कण्वका उसे अपने आश्रमपर लाकर शकुन्तला नाम रखकर पालन करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.72.16 
निर्जने तु वने यस्माच्छकुन्तै: परिवारिता।
शकुन्तलेति नामास्या: कृतं चापि ततो मया॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वह निर्जन वन में शकुन्तों से घिरी हुई थी, इसलिए ‘शकुन्तं लती रक्षत्वेन गृह्णाति’ इस व्युत्पत्ति के अनुसार मैंने इस कन्या का नाम ‘शकुन्तला’ रखा ॥16॥
 
She was surrounded by Shakuntas in the deserted forest, hence, according to the etymology ‘Shakuntan Laati Rakshatven Grihnati’, I named this girl as ‘Shakuntala’. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)