ऋषि: कश्चिदिहागम्य मम जन्माभ्यचोदयत्।
(ऊर्ध्वरेता यथासि त्वं कुतस्त्येयं शकुन्तला।
पुत्री त्वत्त: कथं जाता सत्यं मे ब्रूहि काश्यप॥ )
तस्मै प्रोवाच भगवान् यथा तच्छृणु पार्थिव॥ १९॥
अनुवाद
हे पृथ्वी के स्वामी! एक दिन एक ऋषि यहाँ आए और उन्होंने मेरे जन्म के विषय में पूछा - 'कश्यप के पुत्र! आप तो ब्रह्मचारी हैं, फिर शकुन्तला कहाँ से आई? आपने पुत्री को कैसे जन्म दिया? मुझे सच-सच बताइए।' भगवान कण्व ने उस समय उनसे जो कहा था, वह मैं आपको बता रहा हूँ। कृपया सुनें।
O lord of the earth! One day a rishi came here and asked the sage about my birth. - 'Son of Kashyap! You are a celibate, then from where did Shakuntala come? How did you give birth to a daughter? Tell me the truth.' I am telling you what Lord Kanva told him at that time. Please listen.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥