श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 71: राजा दुष्यन्तका शकुन्तलाके साथ वार्तालाप, शकुन्तलाके द्वारा अपने जन्मका कारण बतलाना तथा उसी प्रसंगमें विश्वामित्रकी तपस्यासे इन्द्रका चिन्तित होकर मेनकाको मुनिका तपोभंग करनेके लिये भेजना  »  श्लोक d13-19
 
 
श्लोक  1.71.d13-19 
ऋषि: कश्चिदिहागम्य मम जन्माभ्यचोदयत्।
(ऊर्ध्वरेता यथासि त्वं कुतस्त्येयं शकुन्तला।
पुत्री त्वत्त: कथं जाता सत्यं मे ब्रूहि काश्यप॥ )
तस्मै प्रोवाच भगवान् यथा तच्छृणु पार्थिव॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे पृथ्वी के स्वामी! एक दिन एक ऋषि यहाँ आए और उन्होंने मेरे जन्म के विषय में पूछा - 'कश्यप के पुत्र! आप तो ब्रह्मचारी हैं, फिर शकुन्तला कहाँ से आई? आपने पुत्री को कैसे जन्म दिया? मुझे सच-सच बताइए।' भगवान कण्व ने उस समय उनसे जो कहा था, वह मैं आपको बता रहा हूँ। कृपया सुनें।
 
O lord of the earth! One day a rishi came here and asked the sage about my birth. - 'Son of Kashyap! You are a celibate, then from where did Shakuntala come? How did you give birth to a daughter? Tell me the truth.' I am telling you what Lord Kanva told him at that time. Please listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)