श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  1.67.138 
सकुण्डलं सकवचं देवगर्भश्रियान्वितम्।
दिवाकरसमं दीप्त्या चारुसर्वाङ्गभूषितम्॥ १३८॥
 
 
अनुवाद
वे कुण्डल और कवच धारण किए हुए प्रकट हुए । वे देवपुत्रों में पाई जाने वाली स्वाभाविक प्रभा से सुशोभित थे । अपने तेज के कारण वे सूर्य के समान प्रकट हो रहे थे । उनके सभी अंग सुन्दर थे, जो उनके सम्पूर्ण शरीर की शोभा बढ़ा रहे थे ॥138॥
 
He appeared with earrings and armour. He was adorned with the natural radiance that is found in the children of the gods. Due to his brilliance, he appeared like the Sun. All his limbs were beautiful, which were enhancing the beauty of his entire body.॥ 138॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)