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mahabharat 1.64.41: दिव्य कर्मों में तत्पर अप्सराएँ और गन्धर्व प्रसन्नतापूर्वक उन्हें प्रणाम करने लगे। पृथ्वी ने भी उनके पास जाकर प्रणाम किया ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 1.64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.64.41 
गन्धर्वैरप्सरोभिश्च दैवकर्मसु निष्ठितै:।
वन्द्यमानं मुदोपेतैर्ववन्दे चैनमेत्य सा॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
दिव्य कर्मों में तत्पर अप्सराएँ और गन्धर्व प्रसन्नतापूर्वक उन्हें प्रणाम करने लगे। पृथ्वी ने भी उनके पास जाकर प्रणाम किया ॥41॥
 
The Apsaras and Gandharvas engaged in divine activities bowed down to him happily. The Earth went near him and bowed down. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)