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mahabharat 1.64.3: वैशम्पायन बोले, "हे राजन! मैंने सुना है कि यह देवताओं का रहस्य है। स्वयंभू ब्रह्मा को प्रणाम करके मैं आज आपको यह रहस्य बताऊँगा।"   |   mahabharat अध्याय 1.64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.64.3 
वैशम्पायन उवाच
रहस्यं खल्विदं राजन् देवानामिति न: श्रुतम्।
तत्तु ते कथयिष्यामि नमस्कृत्य स्वयम्भुवे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, "हे राजन! मैंने सुना है कि यह देवताओं का रहस्य है। स्वयंभू ब्रह्मा को प्रणाम करके मैं आज आपको यह रहस्य बताऊँगा।"
 
Vaishampayana said, "O King! I have heard that this is the secret of the gods. After paying my obeisance to Swayambhu Brahma, I shall narrate this secret to you today."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)