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mahabharat 1.64.27: भरतश्रेष्ठ! इस प्रकार सम्पूर्ण मानव जगत् अत्यन्त सुखी हो गया। मनुजेश्वर! इसी समय राजपत्नियों के गर्भ से राक्षस उत्पन्न होने लगे। 27॥   |   mahabharat अध्याय 1.64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.64.27 
एवं समुदिते लोके मानुषे भरतर्षभ।
असुरा जज्ञिरे क्षेत्रे राज्ञां तु मनुजेश्वर॥ २७॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! इस प्रकार सम्पूर्ण मानव जगत् अत्यन्त सुखी हो गया। मनुजेश्वर! इसी समय राजपत्नियों के गर्भ से राक्षस उत्पन्न होने लगे। 27॥
 
Bharatshrestha! In this way the entire human world was very happy. Manujeshwar! At this time, demons started taking birth from the wombs of royal wives. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)