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mahabharat 1.64.23: हे पुरुषश्रेष्ठ! सब मनुष्य धर्म पर दृष्टि रखते हुए धर्म में ही लगे रहते थे और धर्म-कर्म का अनुष्ठान ही करते थे॥23॥   |   mahabharat अध्याय 1.64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.64.23 
कर्माणि च नरव्याघ्र धर्मोपेतानि मानवा:।
धर्ममेवानुपश्यन्तश्चक्रुर्धर्मपरायणा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! सब मनुष्य धर्म पर दृष्टि रखते हुए धर्म में ही लगे रहते थे और धर्म-कर्म का अनुष्ठान ही करते थे॥23॥
 
Male best! All human beings kept their eyes on religion and were engaged in religion and performed the rituals of religious activities only. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)